नो-कॉस्ट EMI सुनने में मुफ़्त लगती है, पर हर बार ऐसा नहीं होता। बैंक क़र्ज़ पर ब्याज लेता ही है। दुकानें अक्सर वह ब्याज छूट घटाकर या कीमत में जोड़कर वसूल लेती हैं।
ख़रीदने से पहले ये देखें:
1. EMI और नकद, दोनों की कुल कीमत मिलाइए।
2. देखिए कि EMI चुनने पर कोई छूट तो नहीं हट रही।
3. प्रोसेसिंग फ़ीस और ब्याज पर लगने वाला GST देखिए।
4. बैंक-कार्ड ऑफ़र की शर्तें पढ़िए।
5. बीच में बंद करने पर लगने वाला शुल्क पूछिए।
अगर EMI में कुल रक़म नकद से ज़्यादा है, तो वह असल में नो-कॉस्ट नहीं है। हमारे टूल का EMI टैब इसी हिसाब में मदद करता है।
