पेनड्राइव या हब पर “USB 3.2”, “400MB/s” जैसे नंबर लिखे होते हैं। इनका मतलब समझ लें तो पैसा बर्बाद नहीं होता।
USB का संस्करण
- USB 2.0: सबसे धीमा, सैद्धांतिक अधिकतम लगभग 480 Mbps।
- USB 3.x (3.0, 3.1, 3.2): कहीं ज़्यादा तेज़। 3.2 Gen 1 का अधिकतम लगभग 5 Gbps होता है।
लिखी हुई रफ़्तार हमेशा ऊपरी सीमा होती है। असली गति आम तौर पर उससे कम मिलती है, क्योंकि फ़ाइल का आकार, कंप्यूटर का पोर्ट और ड्राइव की अपनी सीमा असर डालती है।
MB/s और Mbps में फ़र्क़
MB/s (बड़ा B) मेगाबाइट प्रति सेकंड है। Mbps (छोटा b) मेगाबिट प्रति सेकंड है। 8 बिट का 1 बाइट होता है। इसलिए 400MB/s पढ़ने की रफ़्तार बहुत तेज़ मानी जाती है, पर वह सिर्फ़ पढ़ने की है। लिखने की रफ़्तार अक्सर कम होती है।
पेनड्राइव चुनते समय
- फ़ोन से जोड़ना हो तो दोनों तरफ़ वाला (Type-C और Type-A) लें।
- बड़ी फ़ाइल बार-बार ले जानी हों तो 3.x वाला लें।
- सिर्फ़ तस्वीरें या दस्तावेज़ रखने हैं तो सस्ता भी चल जाता है।
- असली गति के लिए पोर्ट भी 3.x वाला होना चाहिए, वरना ड्राइव धीमी ही चलेगी।
USB-C हब चुनते समय
- पहले गिनिए कि कितने पोर्ट काम के हैं: HDMI, USB, SD कार्ड, चार्जिंग।
- हब सस्ता हो तो एक साथ कई पोर्ट चलाने पर गर्म हो सकता है और धीमा हो सकता है।
- HDMI से बड़ी स्क्रीन जोड़नी हो तो देखें कि 4K किस रेट (30Hz या 60Hz) पर चलता है।
- चार्जिंग वाला पोर्ट हो तो उसका वॉट देखें।
कम शब्दों में
नंबर से ज़्यादा यह देखिए कि आपका पोर्ट, केबल और ड्राइव तीनों एक ही स्तर के हों। एक भी धीमा हुआ तो सबसे धीमे के बराबर ही चलेगा।
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