चार्जर और केबल: वॉट, PD और केबल जल्दी ख़राब क्यों होता है

एक ही चार्जर से कभी फ़ोन तेज़ चार्ज होता है और कभी धीरे। इसकी वजह अक्सर चार्जर, केबल और फ़ोन, तीनों का मेल होती है।

वॉट का सीधा मतलब

वॉट = वोल्ट × एम्पियर। चार्जर पर 45W लिखा है तो इसका मतलब है कि वह ज़्यादा से ज़्यादा 45W दे सकता है। फ़ोन उतना ही लेता है जितना उसे चाहिए। 45W का चार्जर 25W वाले फ़ोन को नुक़सान नहीं पहुँचाता, पर फ़ोन अपनी सीमा तक ही चार्ज होगा।

PD क्या है

PD (Power Delivery) एक आम तरीक़ा है जिसमें चार्जर और डिवाइस आपस में बात करके सही बिजली तय करते हैं। यह Type-C पोर्ट पर चलता है। फ़ोन, टैबलेट और लैपटॉप, तीनों के लिए एक ही चार्जर इसी वजह से चल पाता है।

केबल भी मायने रखता है

  • हर केबल हर वॉट नहीं झेल पाता। 60W तक के केबल आम हैं। उससे ज़्यादा के लिए ख़ास केबल लगता है।
  • सस्ता और पतला केबल अक्सर तेज़ चार्जिंग नहीं देता, भले ही चार्जर तेज़ हो।
  • केबल में डेटा भी चलता है या सिर्फ़ चार्जिंग, यह पैकेट पर देखें।

केबल जल्दी क्यों ख़राब होता है

सबसे बड़ी वजह है बार-बार मोड़ना और खींचना। ज़्यादातर केबल कनेक्टर के पास से टूटते हैं। इन बातों से केबल लंबा चलता है:

  • चार्जिंग के समय फ़ोन को केबल से लटकाकर न चलाएँ।
  • केबल को कसकर लपेटने के बजाय ढीला गोल रखें।
  • प्लग निकालते समय तार को नहीं, कनेक्टर को पकड़ें।

कम शब्दों में

तेज़ चार्जिंग के लिए तीन चीज़ें मिलनी चाहिए: सही वॉट का चार्जर, अच्छा केबल और तेज़ चार्जिंग सपोर्ट करने वाला फ़ोन। इनमें से एक भी कमज़ोर हो तो रफ़्तार वहीं रुक जाती है।

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